TET Practice Test - लोकोक्तियाँ (Lokoktiyan)

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TG/AP TET Special Practice Test - हिंदी (लोकोक्तियाँ: अत्यंत कठिन एवं अनुप्रयोग स्तर)

विषय: लोकोक्तियाँ (Application Based MCQs)

समय शेष: 10:00 मि.


प्रश्नोत्तरी 1: सोहन ने अपने जीवन की सारी जमा-पूंजी एक अत्यंत अनाड़ी और अपरिचित व्यक्ति के हाथ में इस भरोसे सौंप दी कि वह उसे रातों-रात दोगुना कर देगा, परिणाम यह हुआ कि सब कुछ लुट गया। इस स्थिति पर सटीक बैठने वाली लोकोक्ति कौन सी है?

/ अंधी पीसे कुत्ता खाए
स्पष्टीकरण: यहाँ अयोग्य व्यक्ति के हाथ में जिम्मेदारी सौंपने से सर्वनाश होने का संदर्भ है, जिसके लिए 'अंधी पीसे कुत्ता खाए' अथवा अविवेकपूर्ण निर्णय की स्थिति लागू होती है। (नोट: अंधी पीसे कुत्ता खाए - कमाई कोई और खाए कोई अन्य)। सही विकल्प (c) है।

प्रश्नोत्तरी 2: एक प्रशासनिक अधिकारी ने अपने कार्यकाल के शुरुआती वर्षों में जमकर भ्रष्टाचार किया और जब जांच की आंच तेज हुई, तो उसने अपनी सारी संपत्ति धार्मिक ट्रस्ट और दान-पुण्य में लगानी शुरू कर दी ताकि खुद को पवित्र दिखा सके। इस चरित्र पर कौन सी लोकोक्ति सटीक बैठती है?

स्पष्टीकरण: जीवनभर बुरे या अनैतिक कार्य करके अंत में धर्म का ढोंग रचना या पवित्र बनने का नाटक करने के लिए 'नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली' लोकोक्ति का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्नोत्तरी 3: एक छोटे से स्थानीय चुनाव में दो धुरंधर नेता आपस में भिड़ गए और चुनाव जीतने के लिए दोनों ने अपनी पूरी ताकत, प्रतिष्ठा और धन झोंक दिया, लेकिन जब परिणाम आया तो जीत एक ऐसे साधारण निर्दलीय उम्मीदवार की हुई जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इस परिदृश्य के लिए उपयुक्त लोकोक्ति है:

स्पष्टीकरण: जब दो शक्तिशाली पक्षों के आपसी संघर्ष या प्रतिद्वंद्विता का लाभ कोई तीसरा अनायास उठा ले जाता है, तो वहाँ इस प्रकार की संदर्भगत लोकोक्तियाँ सटीक बैठती हैं।

प्रश्नोत्तरी 4: किसी उच्चशिक्षित शोधार्थी ने अपने पूरे जीवन में केवल प्राचीन पांडुलिपियों का गहराई से अध्ययन किया, परंतु जब व्यावहारिक जीवन की जटिल समस्याओं को सुलझाने की बारी आई, तो वह बिल्कुल असमर्थ साबित हुआ। इस स्थिति को दर्शाने वाली सबसे उपयुक्त लोकोक्ति कौन सी है?

स्पष्टीकरण: 'पढ़े फारसी बेचे तेल, यह कुदरत का खेल' का प्रयोग तब होता है जब उच्च योग्यता या शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को भी उसकी योग्यता के अनुरूप व्यावहारिक फल या कार्य न मिले।

प्रश्नोत्तरी 5: एक चालाक व्यापारी ने अपने प्रतिद्वंद्वी को बाजार से पूरी तरह मिटाने के लिए कई हथकंडे अपनाए, लेकिन जब सारे दांव उल्टे पड़ गए और उसका खुद का व्यवसाय दिवालिया होने की कगार पर आ गया, तब उसने अपनी हार स्वीकार करते हुए अहंकार छोड़ दिया। इसके लिए सही लोकोक्ति चुनें:

स्पष्टीकरण: यहाँ चालाकी या धूर्तता जब स्वयं पर भारी पड़ जाए या विपरीत परिस्थिति में घमंड चूर हो जाए, तो 'मियां की जूती मियां के सिर' अथवा 'रस्सी जल गई पर ऐंठन...' (विपरीत अर्थ में) का संदर्भ बनता है। यहाँ सही उत्तर विकल्प (b/c संदर्भानुसार - धूर्तता उल्टी पड़ने पर 'मियां की जूती मियां के सिर' अधिक सटीक है)। *संशोधित विकल्प चयन: b*।

प्रश्नोत्तरी 6: निम्नलिखित में से कौन सी लोकोक्ति इस दार्शनिक सत्य को दर्शाती है कि मनुष्य को अपने पूर्व संचित कर्मों (अच्छे या बुरे) का परिणाम इस लोक में भोगना ही पड़ता है, उससे कोई नहीं बच सकता?

स्पष्टीकरण: 'जैसी करनी वैसी भरनी' और 'दाने-दाने पर मुहर है' कर्मा सिद्धांत और भाग्य/कर्म के अटल विधान को दर्शाती हैं।

प्रश्नोत्तरी 7: जब कोई अत्यंत साधारण क्षमता वाला व्यक्ति किसी उच्च पद पर बैठकर बड़े-बड़े फैसले लेने का दिखावा करता है, तब ग्रामीण अंचल में किस लोकोक्ति का सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है?

स्पष्टीकरण: अपनी योग्यता या औकात से बढ़कर बड़ी बातें करने या निर्णय लेने की स्थिति में 'छोटे मुंह बड़ी बात' और मूर्खों के बीच कम ज्ञानी के लिए 'अंधों में काना राजा' उपयुक्त है।

प्रश्नोत्तरी 8: यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक गंभीर आर्थिक तंगी और दुखों को झेलने के बाद, किसी बहुत छोटी सी सहायता मिलने पर अत्यधिक प्रसन्न हो जाता है, तो इस मनोदशा पर कौन सी लोकोक्ति सटीक बैठेगी?

स्पष्टीकरण: घोर संकट या विपत्ति के समय थोड़ी सी भी मदद मिलने पर उसे बड़ी राहत के रूप में स्वीकार करने को 'डूबते को तिनके का सहारा' कहते हैं।

प्रश्नोत्तरी 9: एक राजनेता ने चुनाव से पहले जनता को लुभावने सपने दिखाए, बड़े-बड़े वादे किए, परंतु सत्ता में आने के बाद उसने जनता की सुधि तक नहीं ली। आम जनता अब आपस में कह रही है कि — इस संदर्भ में कौन सी लोकोक्ति चरितार्थ होती है?

स्पष्टीकरण: कथनी और करनी में अंतर होना अथवा दिखावे की स्थिति के लिए 'हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और' सर्वाधिक उपयुक्त लोकोक्ति है।

प्रश्नोत्तरी 10: यदि कोई हठ्ठी और दुष्ट प्रवृत्ति का व्यक्ति प्रेम, सद्भाव और समझाइश की भाषा से बिल्कुल भी न सुधरे, बल्कि बार-बार गलती करे, तो उसके लिए कौन सा व्यवहारिक उपाय या लोकोक्ति अपनाई जाती है?

स्पष्टीकरण: दुष्ट और हठ्ठी स्वभाव वाले लोगों पर प्रेम या उपदेश का असर नहीं होता, उनके लिए सख्ती जरूरी होती है, जिसे 'लातों के भूत बातों से नहीं मानते' लोकोक्ति द्वारा व्यक्त किया जाता है।